28 जून 2025 को सामने आया कि अंबिकापुर की एक युवती को ‘अच्छी सैलरी’ का झांसा देकर उत्तर प्रदेश ले जाया गया और ₹1 लाख में बेच दिया गया। जब उसने जबरन शादी से इनकार किया, तभी यह मामला खुला। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया और पीड़िता को सुरक्षित बचाया गया ।

अब तक की जांच में पता चला कि आरोपी पीड़िता को नहीं बेचने की मांगों के कारण जबरन शादी करवाना और यौन शोषण जैसे अपराध करने की योजना बना रहे थे ।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरगुजा पुलिस ने अँधेरी साजिश को जल्द उजागर करते हुए आरोपी तस्करों को गिरफ्तार किया, जबकि प्रदेश भर में मानव तस्करी के अन्य मामलों पर भी कड़ी कार्रवाई जारी है ।
पीड़िता की स्थिति नौकरी के बहाने अपहरण व जबरन विवाह का शिकार; फिलहाल सुरक्षित हैं।
आरोपी 7 गिरफ्तार, उनमें मध्यप्रदेश व यूपी के लोग; 2-3 आरोपी फरार थे, जिनकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
एजेंसियाँ सक्रिय सरगुजा पुलिस द्वारा तहकीकात तेज—अब अन्य तस्करी नेटवर्क भी संदिग्ध हैं।
आगे की कार्रवाई आरोपियों के खिलाफ अदालत में मानव तस्करी और रोकथाम अधिनियमों के तहत वैधानिक कार्रवाई l आदिवासी क्षेत्र सरगुजा में इस तरह के उत्पीड़न की घटनाएँ पहले भी सामने आ चुकी हैं — इसे रोकना प्राथमिकता बननी चाहिए ।
सुरक्षा व जागरूकता: युवाओं को नौकरी-शादी जैसे लालचों से सावधान करने के लिए जनजागरूकता अभियान की आवश्यकता।
पुलिस और शासन: त्वरित जांच व गिरफ्तारी से स्पष्ट संदेश गया कि तस्करी पर अपराधिक कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अंबिकापुर की यह घटना मानव तस्करी की भयावहता को उजागर करती है—यहां “नौकरी और शादी” जैसे छद्म लालच देकर पीड़ितों को धोखा दिया गया। सरगुजा पुलिस की तत्परता और 7 आरोपियों की गिरफ्तारी एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक संरचनात्मक बदलाव और सामाजिक अभियान ज़रूरी हैं।
